Testicular Cancer

टेस्टिकुलर कैंसर युवाओ में तेजी से बढ़ रहा हैं | जानिए इसके कारण, लक्षण और उपचार के बारे में |

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टेस्टिक्यूलर कैंसर (अंडकोष का कैंसर) तब होता है जब अंडकोष (टेस्टिस) की असामान्य कोशिकाएं अनियंत्रित ढंग से विकसित होने लगती हैं। वृषण पुरूष प्रजनन प्रणाली का हिस्सा है। वे शिश्न के पीछे अंडकोष नामक त्वचा की थैली में पाए जाते हैं वीर्यकोष की कोशिकाओं में अनियंत्रित तरीके से वृद्धि के कारण ही मूत्राशय कैंसर या वृषण कैंसर होता है. यह अंडकोश में होनेवाला एक विषैला, कष्टदायक फोड़ा है|

परन्तु बहुत कम पुरुष इस रोग का शिकार होते हैं l यह पुरुषों की सेक्‍स ग्रंथियां हैं जो अंडकोष की थैली में होती हैं और टेस्‍टोस्‍टेरॉन और अन्‍य हार्मोन का उत्‍पादन करती हैं। यह थैली प्रजनन कोशिकाओं के लिए भी जिम्‍मेदार है।

टेस्टिकुलर कैंसर का कारण (Testicular Cancer Causes)

Testicular cancer खतरे का कारण, जो स्वास्थ्य संबंधी किसी विशेष स्थिति (बीमारी) जैसे कि टेस्टिक्यूलर कैंसर के होने की अधिक संभावना से जुड़ा हुआ होता है। बावजूद इसके कि टेस्टिक्यूलर कैंसर से पीड़ित किसी व्यक्ति में खतरे का कोई कारण हो, यह जानना सामान्यतः मुश्किल होता है कि उस खतरे के कारण ने उनकी बीमारी के विकास में कितना योगदान दिया।

Testicular cancer (अंडकोष का कैंसर) पुरुषों में होने वाली एक घातक बीमारी है। इसलिए हर पुरुष को Testicular cancer के बारे में पूरी जानकारी रखनी चाहिए।

इससे समय पर आसानी से इस बीमारी की पहचान की जा सकती है और शुरूआती अवस्था में ही इलाज के जरिए इसे ठीक किया जा सकता है। टेस्टिकल में गांठ या टेस्टिकल बड़ा हो जाना टेस्टिकुलर कैंसर के शुरूआती लक्षण हैं।

टेस्टिकल के बढ़ने, गांठ होने, कठोर होने या दर्द होने पर जितनी जल्दी हो सके इसका इलाज कराना चाहिए। टेस्टिकुलर कैंसर एक गंभीर बीमारी है लेकिन इसका इलाज संभव है चाहे भले ही वह मेटास्टैटिक हो।

तो आइए जानें कि टेस्टिकल कैंसर के शुरुआती लक्षण क्या हैं (Testicular Cancer Symptoms):-

पेट या पीठ में दर्द होना :- टेस्टिकुलर कैंसर का शुरूआती लक्षण है। स्टडी में पता चला है कि लिम्फ नोड के बढ़ने से कैंसर लिवर तक पहुंच जाता है जिससे कि लिवर में दर्द होने लगता है।

टेस्टिकल के गांठ में दर्द न होना :- शुरुआत में यह गांठ मटर के दाने के बराबर होती है लेकिन धीरे-धीरे काफी बड़ी हो जाती है। अगर आपको ऐसे लक्षण दिखे तो इसका इलाज तुरंत कराना चाहिए। ये खतरनाक है।

टेस्टिकल की थैली का बढ़ना :- टेस्टिकल की थैली में भारीपन महसूस होना कैंसर का शुरूआती लक्षण है। थैली के बढ़ने और इसमें दर्द होने पर इसकी अनदेखी नहीं करनी चाहिए और तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए। ये आपके लिए संकेत है इसे नजरअंदाज ना करें।

टेस्टिकल की थैली में तरल पदार्थ जमना :- टेस्टिकल की थैली से तरल पदार्थ होना सामान्य बात है। लेकिन अगर यह एक हफ्ते से ज्यादा दिनों तक रहता है तो आपको सावधान हो जाना चाहिए। स्टडी में पता चला है कि टेस्टीकुलर की थैली में अचानक तरल पदार्थों के इकट्ठा होने से Testicular cancer होने की आशंका होती है।

टेस्टिकल के आकार में परिवर्तन :- टेस्टिकल के आकार में परिवर्तन कैंसर का शुरुआती लक्षण हो सकता है। इसके अलावा यदि आपको टेस्टिकल में सूजन दिखता है तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए। ये कैंसर के संकेत हो सकते है।

जानिए टेस्टिकुलर कैंसर क्या क्या कारण हो सकते हैं :-

एचआईवी पॉजिटिव मरीजों को भी कैंसर का यह प्रकार हो सकता है।

डाउन सिंड्रोम या क्लिनफेल्‍टर सिंड्रोम ग्रस्‍त महिलाओं को भी हो सकता है।

यद्यपि टेस्टिक्यूलर कैंसर के कारणों को अच्छी तरह नहीं समझा जा सका है, बीमारी विकसित होने के जोख़िम से संबद्ध अनेक कारण हैं।

अगर घर में किसी को यह कैंसर हो चुका है तो परिवार के अन्‍य लोग इसकी गिरफ्त में आ सकते हैं। यह एक आनुवांशिक बीमारी है।

जिनके गुप्‍तांगों का विकास नही हो पाता उनको भी टेस्टिकुलर कैंसर का खतरा होता है।

टेस्टिकल कैंसर के बचाव व उपचार कैसे होता है ?(Testicular Cancer Treatment)

वृषण कैंसर से बचने का कोई तरीका नहीं है, लेकिन इसका जल्दी निदान होना महत्वपूर्ण है। पुरुषों को हर महीने वृषण की आत्म परीक्षा करनी चाहिए। यदि आप 15 वर्ष से अधिक आयु के पुरुष हैं और आपको वृषण की आत्म परीक्षा के तरीके के बारे में नहीं पता है, तो अपने चिकित्सक से इसके बारे में पूछें। यदि आपको अपने अंडकोश में कोई बदलाव (गांठ, कठोरता, लगातार दर्द या अंडकोश का बड़ा या छोटा होना) महसूस हो, तो तुरंत अपने डॉक्टर को सूचित करें ताकि उसकी जांच की जा सके।

वृषण कैंसर का उपचार तीन तरीकों से किया जाता है। आपके कैंसर के स्तर पर निर्भर करते हुए, आपको एक या एक से अधिक विकल्पों की आवश्यकता हो सकती है।

सर्जरी :-सर्जरी का उपयोग एक या दोनों अंडकोषों और कुछ आसपास के लिम्फ नोड्स को निकालने के लिए किया जाता है।

विकिरण चिकित्सा (Radiation therapy)

विकिरण चिकित्सा में कैंसर कोशिकाओं को मारने के लिए उच्च-ऊर्जा किरणों का उपयोग किया जाता है। इसे बाहरी या आंतरिक रूप से प्रशासित किया जा सकता है।

कीमोथेरेपी (Chemotherapy)

कीमोथेरेपी में कैंसर की कोशिकाओं को मारने के लिए दवाओं का उपयोग किया जाता है। यह उपचार उन कैंसर कोशिकाओं को मारता है जो शरीर के अन्य हिस्सों में फ़ैल चुके हैं। जब इसे मौखिक रूप से या नसों के माध्यम से दिया जाता है, तो रक्तप्रवाह के माध्यम से कैंसर की कोशिकाओं को मार सकता है।

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